पत्र मिलते ही देर शाम धरने पर पहुंचे बार अध्यक्ष-महासचिव
अधिवक्ता को जूस पिलाकर खत्म कराया अनशन
मंगलवार को सीएम से बार एसोसिएशन की मुलाकात के आसार
राजेश भाटिया,हिन्द लाइव न्यूज।
मुरादाबाद।
रजिस्ट्री कार्यालय में निजीकरण के खिलाफ चल रहे आंदोलन में नया मोड़ आया है। सोमवार को शासन ने निजीकरण पर अपना फैसला वापस ले लिया। अलबत्ता मुरादाबाद में धरना स्थल पर आमरण अनशन पर बैठे अधिवक्ता को जूस पिलाकर अनशन समाप्त करा दिया।
हालांकि बार एसोसिएशन का कहना है कि अभी आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। संभावना है कि मुख्यमंत्री से मंगलवार को बार एसोसिएशन के प्रतिनिधियों की भेंट हो सकती है। सोमवार को मुरादाबाद में मुख्यमंत्री की मौजूदगी के दौरान प्रदेश में निबंधन कार्यालय से यह आदेश जारी हुआ तो अधिवक्ताओं के चेहरे खिल गए।

पिछले दिनों उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा रजिस्ट्री व्यवस्था के निजीकरण संबंध में आदेश जारी हुए तो प्रदेश भर में वकील, दस्तावेज लेखक,स्टांप वेंडर समेत तमाम लोग विरोध में आ गए। और आंदोलन शुरु हो गया। मुरादाबाद में दि बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी ने सोमवार से रजिस्ट्री दफ्तर पर धरने का निर्णय लिया गया।एक पखवारे से रजिस्ट्री कार्यालय पर धरना प्रदर्शन चल रहा है।इस बीच वकीलों ने सड़क पर उतरकर आदेश का विरोध जताया। रजिस्ट्री कार्यालय से पैदल जुलूस निकालते हुए कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे और नारेबाजी करते हुए डीएम को ज्ञापन सौंपा। तभी से वकीलों का आंदोलन लगातार चल रहा है।निजीकरण को लेकर बार एसोसिएशन ने सोमवार को मुख्यमंत्री के आगमन पर मिलने के लिए समय मांगा।मुख्यमंत्री से भेंट के लिए जिला प्रशासन को पत्र भी दिए गए।शाम को वकीलों के लिए सुखद खबर आई।
सोमवार को महानिरीक्षक निबंधन की ओर से ई पंजीकरण माँडयूल संबंधितआदेश को वापस लेने के आदेश जारी हुए। पत्र के बाद अधिवक्ता भी फूले न समाए। दरअसल मुरादाबाद में वकीलों ने आंदोलन के क्रम में आमरण अनशन शुरु किया।पहले दिन धरना स्थल पर अधिवक्ता अभिनव भट्ट बैठे थे। नया शासनादेश जारी हुआ तो बार एसोसिएशन अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता व महासचिव कपिल गुप्ता समेत तमाम वकील धरना स्थल पर पहुंचे।आमरण अनशन पर बैठे अधिवक्ता को जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया।
अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता का कहना है कि शासन से पत्र जारी हुआ है। फिलहाल अधिवक्ता को जूस पिलाकर अनशन समाप्त किया गया है।मुख्यमंत्री से मुलाकात होनी बाकी है।अभी हड़ताल समाप्त नहीं हुई है।
इस दौरान योगेंद्र चौधरी, पुष्प यादव, प्रदीप गुप्ता, राजीव चौधरी, सेवी शर्मा, समिताब सिंह, सौरभ चक्रवर्ती, मयंक शर्मा सहित तमाम अधिवक्ता रहे।
