विवाहिता को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने में भी दोषी
गुरुवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट-प्रथम ने सुनाया फैसला,दोषियों पर 60-60 हजार रुपये जुर्माना
मझोला में नौ साल पुराने केस में मिली दोषियों को कारावास की सजा
राजेश भाटिया।हिन्द लाइव न्यूज।मुरादाबाद।
नौ साल पहले विवाहिता की संदिग्ध परिस्थतियों की मौत के मामले में सास-ससुर को दोषी ठहराया गया।अदालत ने महिला को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने में दोषी मानते हुए 5-5 साल की सजा सुनाई। दहेज उत्पीड़न में भी अदालत ने दोषी माना। और 3-3 साल की सजा सुनाई।प्रत्येेक दोषी पर 60 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

थाना मझोला के गांव डिडौरा के रहने वाले अब्दुल सलीम ने 15 जुलाई, 2017 को मुकदमा कायम कराया। आरोप लगाया गया था कि उसकी पुत्री समीना को विवाह के बाद दहेज के लिए प्रताड़ित किया। जिसके बाद उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने जांच की विवेचना के बाद पुलिस ने मृतका के ससुर बुंदू अली और सास अनीसा के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया।
केस की सुनवाई एफटीसी कोर्ट-प्रथम प्रीति सिंह की अदालत में हुई।एडीजीसी अशोक कुमार यादव के अनुसार अदालत में अभियोजन की ओर से गवाह पेश किए गए।वादी समेत छह गवाहों के कोर्ट में बयान हुए।सुनवाई के दौरान अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के बयानों माना कि विवाहिता को प्रताड़ित करने व उसे आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के पर्याप्त साक्ष्य हैं।
अदालत ने साक्ष्य के आधार पर आत्महत्या के लिए प्रेरित करने में दोषी मानते हुए 5-5 साल व 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। दहेज उत्पीड़न धारा 498-ए आईपीसी में भी 3-3 साल व 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।एडीजीसी ने बताया कि अदालत ने जुर्माने की राशि का 90 प्रतिशत रकम मृतका के पिता को प्रतिकर के रूप में देने के आदेश दिए है।
