5 गांवों के संवेदनशील गन्ने के खेतों पर निगाह
20 एआई कैमरे,एक ड्रोन व दस रेस्क्यू केज से स्मार्ट सुरक्षा कवच
पायलट प्रयोग सफल तो 50 किमी के दायरे में होगा विस्तार
हिन्द लाइव न्यूज,राजेश भाटिया।

मुरादाबाद। आदमखोर हुए तेंदुओं की दहशत खत्म करने की तैयारी है। इससे निपटने के लिए जिला प्रशासन ने हाइटेक सुरक्षा कवच बनाया है। पायलट प्रोजेक्ट पर करीब 40 लाख रुपए खर्च होंगे। इसका प्रस्ताव प्रदेश शासन को भेजा गया है।प्रोजेक्ट सफल रहा तो पूरे प्रदेश में मानव वन्यजीव संघर्ष वाले जिलों के लिए यह एक उदाहरण बनेगा।
किसानों पर जानलेवा हमलों को रोकने के लिए प्रशासन अमला अब आर्टीफिशियल कैमरों की मदद लेगा। खेत व किसानों की सुरक्षा अब हाईटेक चक्र से होगी।संवेदनशील पांच गांवों में तेंदुओं पर निगहबानी के लिए बीस एआई कैमरे,एक ड्रोन व दस रेस्क्यू केज से सुरक्षा चक्र बनाया गया है। प्रशासन ने तेंदुओं पर चौबीस घंटे निगाह के लिए 39.45 लाख रुपये से हाईटेक सुरक्षा कवच बनाया है। इससे 200 हेक्टेयर में हाईटेक सुरक्षा का जाल तैयार होगा। डीएम ने राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से धनराशि मांगी है।
उत्तराखंड की सीमा लगे मुरादाबाद जिले के ठाकुरद्वारा व कांठ क्षेत्र में गन्ने के घने खेत अब तेंदुओं की ढाल बने है। तेंदुओं का आतंक बढ़ा है।इससे निपटने के लिए प्रशासन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई)बेस्ड ‘स्मार्ट डिफेंस मॉडल’ (स्मार्ट सुरक्षा चक्र) तैयार किया है। प्रदेश शासन को तेंदुओं से निपटने के लिए 39.45 लाख रुपये का विशेष पायलट प्रोजेक्ट भेजा है।
उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (लखनऊ) के राहत आयुक्त व अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी को भेजे गए पायलट प्रोजेक्ट से 5 गांवो में 200 हेक्टेअर अति संवेदनशील क्षेत्र की निगरानी होंगी। प्रस्तावित कार्ययोजना में 24 घंटे रियल-टाइम निगरानी व अर्ली वार्निंग नेटवर्क से लैस रहेगी।
खेतों में 24 घंटे पहरा, एआई कैमरे व सोलर ढांचा
मुरादाबाद। गन्ने के ऊंचे खेतों में छिपने वाले तेंदुओं को ट्रैक करने के लिए प्रशासन ने गश्त के बजाय हाईटेक एआई नेटवर्क की मदद लेगा। 200 हेक्टेयर क्षेत्र में नाइट विजन व स्वचलित पहचान वाले 20 अत्याधुनिक एआई कैमरे लगेंगे।कैमरों को खेतों के बीच 5 बड़े पोल और 15 मध्यम पोल पर लगाया जाएगा।गांवों में बिजली की समस्या को देखते हुए पूरे सिस्टम को सोलर से जोड़ा गया है। सिस्टम में 20 सोलर बैटरी व 20 पैनल लगेंगे। 20 एआई प्रोसेसिंग यूनिट, 20 हाई-स्पीड 4जी कनेक्टिविटी मॉड्यूल, 20 एसएसडी स्टोरेज व 5 लाइटनिंग प्रोटेक्शन यूनिट मौसम की मार से सुरक्षित और निर्बाध रहेगा।
कंट्रोल रूम से लाइव निगरानी,ड्रोन से सर्च ऑपरेशन
पूरे सिस्टम के लिए ‘इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम’ होगा।जैसे ही कोई तेंदुआ या संदिग्ध वन्यजीव एआई कैमरे के फ्रेम में आएगा,एआई बोर्ड तुरंत वीडियो को लोकेशन के साथ कंट्रोल रूम को लाइव अलर्ट भेजेगा।
पायलट प्रोजेक्ट पर 39.45 लाख रुपये खर्च
प्रशसान की पहल पर एडीएम वित्त ने इसकी लागत अनुमान लगा खाका तैयार किया है। इसके तहत 20 एआई कैमरे,10 वन्यजीव रेस्क्यू केज,एआई बोर्ड, सोलर पैनल,सर्विलांस ड्रोन,बड़े व मध्यम पोल, सोलर लाइटिंग,हाई पॉवर टार्च, पीए सिस्टम समेत अन्य सामानों पर ब्योरा तैयार किया गया है।
प्रोजेक्ट की सफलता से दायरा बढ़ेगा
अभी 5 गांवों का पायलट प्रोजेक्ट के प्रयोग के सफल होने पर प्रशासन इसकी दायरा बढ़ाकर 50 किमी किया जाएगा।
