राजेश भाटिया,हिन्द लाइव न्यूज। मुरादाबाद। रविवार को बुद्धि विहार में स्थित अमर वाटिका में देवऋषि नारद जयंती व हिन्दीइ पत्रकारिता के दो सौ वर्ष पूरे होने पर पत्रकार गोष्ठी का आयोजन किया गया। ‘डिजिटल मीडिया के युग में आधुनिक पत्रकारिता’ विषय पर हुई गोष्ठी में आए वक्ताओं का मानना था कि समाज को जागरुक बनाने में पत्रकारों की आज भी योगदान है।हालांकि जोर दिया कि डिजिटल मीडिया के युग में पत्रकारों को सतर्कता की जरुरत है।
कार्यक्रम में मेरठ से प्रकाशित राष्ट्रदेव मासिक के संपादक व प्रांत प्रचार प्रमुख मुख्यी वक्तान सुरेन्द्र सिंह, उत्तर प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ.विशेष गुप्ता व आईएफटीएम विवि के जनसंचार विभागाध्यक्ष प्रो. राजेश शुक्ला अध्यक्ष रहे। गोष्ठी की शुरुआत विभाग प्रचार प्रमुख डॉ.पवन जैन ने की। कहा सृष्टि के प्रथम संवादवाहक के रूप में देवऋषि नारद जी का योगदान भुलाया नहीं जा सकता।नारद जी ने पीड़ित-शोषित की आवाज को मुखर किया। हिंदी के प्रथम समाचार पत्र उदंत मार्तण्ड को याद करते हुए कहा कि यह केवल पत्र नहीं बल्कि स्वतंत्रता चेतना व जनजागरण का सशक्त माध्यम था।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि पत्रकारिता दिवस पर नारद जी का स्मरण करना उनके जीवन से प्रेरणा लेने का अवसर है। कहा कि उदंत मार्तण्ड बंद भले ही हो गया पर समाचार पत्र ने लोगों को एक दिशा दे दी।पत्रकारिता ही है जिसके जरिए समाज में नवसंचार, जागरण, सजीवता व नवस्फूर्ति का संचार होता है।कहा कि पत्रकार को समाज में आज भी सजग प्रहरी के रूप में देखा जाता है।एक पत्रकार सामाजिक परिवर्तन के लिए जो त्याग करता है। उसका वह त्याग ही समाज को गति देना वाला है।समाज के प्रत्येक वर्ग की आवाज पत्रकार ही है। उन्होंने कहा समाज को सही दिशा प्रदान करने, जनजागरूकता पैदा करने में, मानवीय मूल्यों का विकास, लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना में समेत अन्या बिन्दुाओं पर पत्रकार भूमिका निभा सकता है।
कहाकि स्वामी विवेकानन्द, मदनमोहन मालवीय, वीर सावरकर, दीनदयाल उपाध्याय, महात्मा गांधी, स्वामी दयानन्द समेत महान विभूतियों ने समाचार पत्रों का प्रकाशन एवं संपादन कर मार्ग को प्रशस्त किया। समाज को जागरूक करने मे पत्रकारों का अहम योगदान है।
मुख्य अतिथि डॉ विशेष गुप्ता ने कहा कि पत्रकार के लिए पत्रकारिता एक धर्म की तरह है और पत्रकारिता का एक धर्म है- निष्पक्षता। लेखनी तभी प्रभावी होगी जब आप निष्पक्षता के साथ पत्रकारिता करें।पत्रकारिता में आप पक्ष का कोई स्थाभन नहीं।केवल सत्य का पक्ष लेकर खड़े रह सकते है। डिजिटल तकनीक ने पत्रकारिता को बिल्कुल एक नए फलक पर खड़ा किया है। डिजिटल तकनीक, सोशल मीडिया के असर से जहां पत्रकारिता ने गति पकड़ी है तो विश्वसनीयता की कसौटी पर कसने की चुनौतियां भी पहले से ज्यादा बढ़ी हैं।
सोशल मीडिया के असर ने पत्रकार व पत्रकारिता को कहीं ज्यादा जवाबदेह बनाया। अब पत्रकारिता पहले से ज्यादा जीवंत हुई है।दूसरे सिरे पर बैठा पाठक केवल पढ़ कर चुपचाप बैठे रहना वाला नहीं रहा। वो प्रतिक्रियावादी बल्कि किसी समाचार में अगर जरूरी हो बदलाव की वजह तक बनने की हिम्मत रखता है।
पत्रकारों के सामने तथ्य, तस्वीरों की विश्वसनीयता परखने की चुनौतियां तकनीक युग में पहले से कहीं अधिक बढ़ी हैं।
कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. राजेश शुक्ला ने कहा कि पत्रकार का काम हरहाल में साहस के साथ संवाद भी कायम करना करना है न कि विवाद।उन्होंने जनसंचार विभाग के छात्रों का आह्वान किया।कहा कि मीडिया क्षेत्र में असीम संभावनाएं है।ग्राफिक्स, एनीमेशन, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, न्यू मीडिया और नागरिक पत्रकारिता जैसे क्षेत्रों ने युवाओं के लिए रोजगार और सृजनात्मक के नए अवसर उपलब्ध कराए हैं।
कार्यक्रम में महानगर प्रचार प्रमुख संजीव चौधरी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन मेजर राजीव ढल ने किया। जबकि समापन वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के संग हुआ।
इस मौके पर प्रशांत मिश्रा, हरिमोहन गुप्ता, सचिन कुमार, राकेश मिश्रा, रतनलाल एडवोकेट, सुभाष शर्मा, डॉ मुदित सिंघल, कुलदीप कुमार, डॉ सत्यवीर सिंह समेत शहर के वरिष्ठ पत्रकार व साहित्यकार और नागरिक रहे थे।
